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तोलोंङ सिकि नूँ खीरी

टूड़ुसः सय नेम्हस एक्कास

 

चालो गही खंजपा

लोहोड़दगा ती मूँद कोस ख़ोसरा गंडा नूँ सेरेंगहातू नामे गही ओण्टा पद्दा रई। ई पद्दा नूँ ओण्टे इलिया नामे गही इंज्जो पिटुस रहचस। उन्दुल आस जल्लीन होअर ख़ाड़ केरस। ख़ाड़ नूँ जल्ली हिबिड़यस दरा कूटी नूँ उक्कियस। पुत्तबीरी जल्ली ओत्थरस ख़ने जल्ली नूँ इंज्जो गने ककड़ो हूँ बझरकी रहचा। आस गुसन एंड़ गोटंग कोंच्चो रहचा। आस ओण्टे कोंच्चो नूँ इंज्जोन सज्जस दरा अदिन डबचस चिच्चस। तले नंना कोंच्चो नूँ ककड़ोन निंद्दस दरा अदिन कोलोरका अम्बियस चिच्चस।

     ख़ाड़ गंडा नूँ कुद्दु-नुंगुर नूँ जोक्कर अबड़ा कोंच्चो गुसन इज्जर। आर नूँ ओण्टेस इलियासिन आनियस, अना ले, नीन एवंदा भकवा रअदय! सगर उल्ला इंज्जो पिटकय दरा अक्कू नीदी ख़ेक्खा एड़पा किर्रोय केन्दहेर?

      इलियास आस तरा एःरनुम आना किर्ताचस, एकासे, एन्देर मंजा दरा? आ आलस फिन आनियस, नीन ई कोंच्चो नूँ ककड़ोन निंद्दका रअदय, पहें इदिन बेगर डबचका ख़ाड़ कूटी नूँ उयकय रअदय। एःरा ककड़ो बहरी उर्खा गे उड़ो-थुड़ो मना ली। इबड़ा ओण्टे-ओण्टे कोंच्चो ती बहरी बरअर ख़ाड़ नूँ चइल कालो। होले नीन एन्देर ननोय?

       इलियास बाचस, नीन दंद अम्बा नंना। एन इबड़ा ककड़ो गही चालोन अख़दन। इबड़ा भइर मांख़ा चिंहुंट ननो अन्नू हूँ ई कोंच्चो ती पोल्लो उर्खा। एन्देर गे का एका ककड़ो मइंय्या अर्गना गही चिहुँट ननो, अदी गही ख़ेड्डन कीतला कक़ड़ो नतगो दरा फिन किय्या टिड़ओ चिओ। एवंदा गूटी ई कोंच्चो नूँ ओण्टा ती बग्गे ककड़ो रओ, इबड़ा बहरी पोल्लो उर्खा।

 

स्वाभाव का प्रतिफल

लोहरदगा से तीन मील दूर कोयल नदी के किनारे सेरेंगहातू नाम का एक गाँव है। इस गाँव में इलिया नाम का एक मछवारा रहता था। एक दिन वह जाल लेकर नदी गया। नदी में जाल डाला और किनारे पर बैठ गया। सूर्यास्त के समय जाल निकाला तो जाल में मछली के साथ-साथ केकड़े भी फसे हुए थे। उनके पास दो टोकरी थे। एक टोकरी में उसने मछली डालकर ढक दिया। दूसरे टोकरी में केकड़ों को भरकर खुला छोड़ दिया।

     नदी किनारे टहलने वालों में से कुछ लोग उन टोकरियों के पास आकर खड़े हो गये। उनमें से एक ने इलिया से कहा, ओ भाई, तुम कितने बेवकूप हो! दिन भर मेहनत किये, और अब खाली हाथ घर लौटोगे क्या?

      इलिया ने उसकी तरफ देखते हुए उत्तर दिया, क्यों, क्या बात है? उस व्यक्ति ने फिर कहा, तुम इस टोकरी में केकड़ों को भर तो दिये, परन्तु इसे बिना ढके नदी किनारे छोड़ दिये। देखो, केकड़े बाहर निकलने को कितना बेताब हैं। ये सभी एक-एक बाहर निकलकर नदी में चले जायेंगे। तब तुम क्या करोगे?

       इलिया ने कहा, इसकी चिंता मत करो। मैं इन केकड़ों के स्वाभाव को जानता हूँ। ये सारी रात प्रयास कर ले फिर भी इस टोकरी की कैद से छुटकारा नहीं पा सकते। क्योंकि जो केकड़ा ऊपर चढ़ने का प्रयत्न करेगा, उसकी टाँग को नीचे के केकड़े खींच कर नीचे गिरा देंगे। जब तक एक से अधिक केकड़ा इस टोकरी में रहेंगे, ये बाहर निकल ही नहीं सकते।

 

 

ई खीरीन देवनागरी लिपि नूँ बंचआ

चालो गही खंजपा

 

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स्वाभाव का प्रतिफल

 

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रियारका खीःरी गही मूःली पाँति

आलर गही चालो एकासे रओ, अन्नेम आर गही उज्जना एःकना हूँ मनो।