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 कविता

हिन्दी कविताओं की रचयिता - ग्रेस कुजुर

 

 

श्रीमति ग्रेस कुजुर का जन्म 1949 में हुआ था। पिता पैट्रिक कुजुर और माता रूथ केरक्ट्टा के घर में जन्मी श्रीमति ग्रेस कुजूर पढ़ने लिखने में प्रवीण थी। उसने एम. ए. तक शिक्षा ग्रहण की और बी.एड का पाठ्यक्रम पूरा किया। सन् 1976 में वह आकाशवाणी में कार्यक्रम निष्पादक के पद पर पदस्थ हुई। पदोन्नति पर वह आकाशवाणी राँची, पटना, भागलपुर और दिल्ली में केन्द्र निदेशक के पद पर कार्य कर चुकी है। आकाशवाणी महानिदेशालय, नई दिल्ली में उप-महानिदेशक(कार्यक्रम) के पद पर कार्य करते हुए सन् 2008 में सेवामुक्त हुई। आदिवासी परिवार और ग्रामीण परिवेश में पली-बढ़ी श्रीमति ग्रेस कुजुर का अपने संस्कृति और आदिवासी समुदाय के प्रति प्रेम और लगाव प्रशंसनीय है। उनके द्वारा रचित हिन्दी कविताओं में आदिवासी समुदाय और संस्कृति के प्रति प्रगाढ़ स्नेह परिलक्षित होता है। उनकी कविताओं में प्रकृति, आदिवासियों की जीवन-शैली और संस्कृति का अनूठा संगम दिखाई देता है। उनकी रचनाएँ आदिवासियों के ऊपर बाहरी हमले और दमन से उठे दर्द का एहसास कराती है; उनके कलम बद्ध शब्द आदिवासियों को अगाह कराते हुए उनसे बचने तथा संघर्ष करने का आह्वान कराती है। उनकी कविताओं में आदिवासियों के मूल शब्दों को कव्यात्मक और ल्यात्मक अंदाज में समावेश करते हुए पाठकों के दिलो-दिमाग को छूने का प्रयास किया गया है। उनकी भाषा शैली और लिखने के खास आदिवासी अंदाज से संगीत का एहसास होता है और पाठकों को एक अजीब सकुन और चैन मिलता है।

      श्रीमति ग्रेस कुजुर की कविताएँ अनेक हिन्दी पत्र-पत्रिकाओं में छपती रही हैं,  परन्तु हिन्दी साहित्य जगत में अन्य हिन्दी लेखकों की तरह उसे उचित स्थान और सम्मान नहीं मिला। आदिवासी लेखिका होने के कारण हिन्दी साहित्य जगत ने उसकी लेखन-शैली, गुणवता और क्षमता को पहचानने से इन्कार कर दिया। श्रीमति ग्रेस कुजुर ने 40 से भी अधिक कविताएँ लिख चुकी हैं। उन्होंने कई रेडियो नाटक व प्रहसन भी लिखे, जिसे आकाशवाणी से प्रसारित किया गया। उनका रेडियो नाटक "महुआ गिरे आधी रात"  बहुत प्रसिद्ध हुआ। उनके द्वारा रचित रचनाएँ पुस्तक के रूप में प्रकाशित नहीं है। रमणिका गुप्ता द्वारा रचित संकलन "आदिवासी स्वर और नई शताब्दी"  में श्रीमति ग्रेस कुजुर की कविताओं को शामिल किया गया है। श्रीमति ग्रेस कुजुर की रचनाएँ कुँड़ुख़ में नहीं है, परन्तु हिन्दी में उनकी रचनाएँ अविस्मरणीय है। प्रस्तुत है उनके द्वारा रचित कुछ कविताएँ :

सरियारका अनआ-रितआ गही मूँली पाँति

कुँड़ुख़ कत्था नूँ टूड़ा बंचआ, डण्डी पाड़ा अरा तंगआ ख़द्द-खर्रार अरा अयङ बंग्गर गने तंगआ अयङ कत्थानुम गुठियारआ।