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डॉ. निर्मल मिंज द्वारा लिखित "कहानी आदिवासी राजनीति की" पुस्तक का लोकार्पण

राँचीः अगस्त 10, 2014:

डॉ. निर्मल मिंज द्वारा लिखित कहानी आदिवासी राजनीति की नामक पुस्तक का लोकार्पण आज जेवियर समाज सेवा संस्थान में किया गया। इस मौके पर पूर्व आईएएस नरेन्द्र भगत, फादर जेवियर सोरेन, डा. बीपी केसरी, डा. निर्मल मिंज व फादर एलेक्स एक्का ने संयुक्त रूप से पुस्तक का लोकार्पण किया। समारोह को संबोधित करते हुए नरेन्द्र भगत ने कहा कि आज की राजनीति में मुद्दे गौण हो गये हैं और मुद्रा की राजनीति हो रही है। कहानी आदिवासी राजनीति की नामक यह पुस्तक आदिवासी समाज को मार्गदर्शन प्रदान करेगा। पुस्तक में आदिवासी राजनीति के इतिहास, उदय व विकास कैसे हुआ लेखक ने इसे सहज तरीके और रुचिकर ढंग से लिखा है। डा. मिंज की यह पुस्तक आदिवासी समाज में ऊर्जा प्रदान करने का कार्य करेगा। कार्यक्रम के दौरान श्री भगत ने जयपाल सिंह मुण्डा से लेकर कार्तिक उरांव तक के राजनीतिक इतिहास पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि झारखंड में सरकारों को पूर्ण बहुमत नहीं मिलने के कारण राज्य का विकास नहीं हुआ ऐसा कहना जनता को भ्रम में डालने वाला कथन होगा। इससे पूर्व अपने उद्धाटन संबोधन में एक्सआईएसएस के निदेशक फादर एलेक्स एक्का ने कहा कि आदिवासी हितों के संघर्ष को लेकर सबको जोड़ने में यह पुस्तक एक बेहतर माध्यम साबित हो सकती है। डा. बीपी केसरी ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि डा. निर्मल मिंज 87 वर्ष की उम्र में भी आदिवासी समाज की व्यापक चिंता के साथ जी रहे हैं। समाज की चिंता उन्हें चैन से बैठने नहीं देती। यह पुस्तक उनकी इसी मानसिक यातना की पीड़ा है। डा. केसरी ने कहा कि इस किताब के राजनैतिक सुझावों को ग्रहण कर संगठनात्मक ढंग से जाति-धर्म समूह से ऊपर उठकर आन्दोलन करने से विकास संभव है।

      पुस्तक के लेखक डा. निर्मल मिंज ने कहा कि आदिवासी राजनीति लम्बे समय से दबाव में रही है। जयपाल सिंह मुण्डा की पार्टी का विलय भी इसका एक उदाहरण है। उन्होंने कहा कि भारतीय आदिवासियों के नाम विश्व आदिवासियों की सूची में नहीं है। हम विश्व आदिवासी दिवस मना कर प्रसन्न हो रहे हैं। आज जरूरत है अपनी एकता और मजबूती दिखाने की। झारखंड में 28 आदिवासी विधायक हैं लेकिन सभी अपने आप में खोये हैं। उन्होंने कहा कि जिस दिन झारखंड का आदिवासी अपनी ताकत से मुख्यमंत्री बनेगा उस दिन यहां की नीति-रीति उलट जायेगी। इस मौके पर फादर जेवियर सोरेन ने कहा कि एक सकारात्मक सोच के साथ यह पुस्तक लिखी गयी है जिसे आगे बढ़ाने की जरूरत है। इस पुस्तक का हिन्दी में प्रकाशन होने से एक बड़े वर्ग को मार्गदर्शन मिलेगा। पुस्तक में आदिवासी समाज व आदिवासियत पर गंभीर चर्चा की गयी है।

 

 

 

 

 

 

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